एमपी बीजेपी के सभी मोर्चे ‘निष्कृय’ प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा नहीं होने कार्यकर्ताओं में निराशा का वातावरण

साल के 12 महीने और 365 दिन काम करने वाली भारतीय जनता पार्टी के कार्यलाय में इन दिनों वीरानी ने अपने बसेरा बना लिया है। जिस कार्यालय में दिन भर कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी रहा करती थी उस कार्यालय में अंदर कर्मचारी और बाहर कार्यकर्ता अब नदारत रहते हैं। वहीं अगर सातों मोर्चों की बात करें तो उनमें ताले लगे रहते हैं। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष का अभी तक चयन नहीं हुआ और उसी के कारण मोर्चों के नए अध्यक्षों का भी ऐलान नहीं हो पाया है। कई मोर्चों के अध्यक्ष लोकसभा और राज्यसभा सांसद बन चुके हैं और वो अपने क्षेत्रों में ब्यस्त हो चुके हैं। कुछ मोर्चों के अध्यक्ष विधायक बन कर मंत्री भी बन चुके हैं लिहाजा उनके पास मोर्चे के लिए काम करने का समय ही नहीं है। उन्ही मोर्चे के जो अन्य पदाधिकारी थे वो भी अब कार्यालय से नदारत रहने लगे हैं। दरअसल प्रदेश अध्यक्ष का अभी तक चयन हुआ नहीं और जो बचे-खुचे पदाधिकारी हैं उन्हे डर सता रहा है कि अगला अध्यक्ष कौन होगा और जो होगा उससे उनकी बनती है या फिर नहीं इन्ही सब बातों को लेकर इन दिनों मोर्चों के पदाधिकारी परेशान हैं। कुछ मोर्चों के कार्यालय तो अब हफ्ते भर बंद रहने लगे हैं क्योंकि उनके कर्मचारी और पदाधिकारियों ने कार्यालय में आना ही बंद कर दिया है। ठीक उसी प्रकार प्रमुखि कार्यालय के हाल भी हैं जहां पर वीरानी सी छाई रहती है। कई बार तो देखने को मिलता है कि बिजली भी बंद रहती है। कई सारे सोफे लगे हैं लेकिन उनमें बैठने वाला कोई कार्यकर्ता ही नहीं होता है। इसी लिए लाइट भी नहीं जलाई जाती है। धोखे से अगर कोई कार्यकर्ता मिल भी जाए तो वो एक कोने में ले जाकर यही पूछेगा कि अगला प्रदेश अध्यक्ष किसको बना रहे हो।
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