संविदा स्वास्थ्य कर्मियों का सरकार को अल्टीमेटम,21 तक मांगे पूरी नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन होगी हड़ताल

मध्य प्रदेश के संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को तत्कालीन शिवराज सरकार ने शासकीय कर्मचारियों की तर्ज पर सभी सुविधाएं देने का ऐलान किया था जिसके बाद उन्होने विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का साथ दिया। चुनाव के बाद प्रदेश के मुख्य मंत्री बदल गए और उसके साथ ही संविदा स्वास्थ्य कर्मियों की किस्मत भी उनसे रुठ गई। नए आदेश के मुताबिक अब संविदा स्वास्थ्य कर्मियों को उसी आधार पर काम करना होगा जैसे उनकी नियुक्ति हुई थी। गौरतलब है कि प्रदेश के सभी जिलों में मिला कर करीब 32 हजार की संख्या में संविदा स्वास्थ्य कर्मी काम कर रहे हैं। राज्य सरकार से धोखा मिलने के बाद संविदा स्वास्थ्य कर्मियों ने राज्य सरकार को एक अल्टीमेटम दिया है जिसमें उन्होने कहा है कि 21 दिन के अंदर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो सभी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिए मजबूर होंगे। गौरतलब है कि ये सभी कर्मचारी राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत वर्शों से अपनी सेवाएं देते आ रहे हैं। इनकी मांग है कि उन्हे नियमित किया जाना चाहिए। इन सभी संविदा कर्मियों ने राज्य सरकार के साथ कोरोनाकाल में भी अपनी जान की परवाह किए बगैर काम किया उसके बाद भी इन कर्मचारियों को राज्य सरकार की तरफ से वो महत्व नहीं दिया गया जिसके वो अधिकारी थे। इन्होने अपनी मांगो को लेकर कई बार आंदोलन भी किया जिसके फलस्वरुप तत्कालीन सरकार ने इन्हे आश्वासन दिया लेकिन वो सिर्फ आश्वासन तक ही सीमित रह गया और संविदा कर्मियों के हाथ कुछ नहीं लगा। अब सरकार के क्रियाकलाप से निराश होकर एक बार फिर इन कर्मचारियों ने आंदोलन का रास्ता पकड़ा है। माना जा रहा है कि इनकी हड़ताल के बाद प्रदेश की स्वास्थ्य ब्यवस्था चरमरा सकती है।
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