'सुन लो रे कांग्रेसियो प्रदेश के हर घर में लाड़ली बहनों का ही राज चलता है'
मप्र में एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी ने प्रचंड जीत दर्ज की है (madhya pradesh elections)। प्रदेश का हर राजनीतिक पंडित यही कह रहा था कि इस बार टफ फाइट है,कुछ ने यह माना कि इस बार के चुनाव में कांग्रेस पार्टी 140 से 160 सीटें जीतेगी,लेकिन उन राजनीतिक पंडितों को यह नहीं मालूम था कि हारी बाजी कैसे जीती जाती है उसका सबसे बड़ा उदाहरण मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (shivraj singh chouhan) हैं। जहां से राजनीतिक पंडितों की सोच खत्म होती है वहीं से मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सोच शुरु होती है। प्रदेश का हर ब्यक्ति यही कह रहा था कि सीएम के खिलाफ एंटीइंबेंसी है लेकिन उसे प्रो इंकंबेंसी में कैसे तब्दील करना है यह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बखूबी आता है। जिस वक्त लोग पाला बदलने में लगे थे उस वक्त मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी योजनाओं को अमली जामा पहनाने में लगे थे। मुख्यमंत्री ने सबसे पहले प्रदेश की आधी आवादी यानि महिलाओं को भाजपा की सरकार और खुद से जोड़ने की मुहिम शुरु की (ladli behna)। जिसके तहत उन्होने लाड़ली बहना योजना का आगाज किया। जिसके तहत सीएम शिवराज ने महिलाओं को आर्थिक रुप से सक्षम बनाने पर जोर दिया और उन्हे एक हजार रुपये देने की घोषणा कर दी। योजना की पहली किस्त डालते समय मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा दांव खेला और कहा कि इस योजना को वो आगे बढ़ा कर तीन हजार रुपये तक कर देंगे। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने लाड़ली बहना योजना के तहत घरेलू गैस सिलेंडर को 450 रुपये में देने की घोषणा भी कर दी। इस योजना को लांच करने के बाद मुख्यमंत्री ने ताबड़ तोड़ सभाएं लेनी शुरु की और महिलाओं से लगातार संपर्क और संवाद किया। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को इस बात का अहसास था कि बहनें अपने भाई को कभी धोखा नहीं दे सकतीं। और भाई बहन के इस अटूट संबंध को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लगातार मजबूत किया। सीएम शिवराज की जितनी तस्वीरें भी जारी होती थी वो लाड़ली बहनों के साथ ही होती थी। आखिरकार मुख्यमंत्री द्वारा बनाई गई रणनीति काम आई और लाड़ली बहनों ने अपने लाड़ले भाई का विश्वास नहीं तोड़ा। यह भी बता दिया कि घर के बाहर किसी का राज चले लेकिन घर के अंदर लाड़ली बहनों का ही राज चलता है।

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