सरकार से नाराज शासकीय कर्मचारियों ने दिखाई मतदान में उदासीनता,वोटिंग में नहीं ली दिलचश्पी

Apr 29, 2024 - 07:55
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सरकार से नाराज शासकीय कर्मचारियों ने दिखाई मतदान में उदासीनता,वोटिंग में नहीं ली दिलचश्पी
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प्रदेश में हो रही कम वोटिंग इस वक्त सभी राजनीतिक दलों के लिए चर्चा का विषय बनी हुई है| लेकिन अभी तक कोई इस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाया कि आखिर वोटिंग कम होने का प्रमुख कारण क्या है| इस मामले में जब Mukhbirmp.com की टीम ने पड़ताल शुरु की तो चौकाने वाली बातें सामने आई जिसके बारे में किसी ने सोचा ही नहीं| दरअसल केन्द्र सरकार की ओर से शासकीय कर्मचारियों को 50 फीसदी मंहगाई भत्ता दिया जा रहा है लेकिन प्रदेश की मोहन सरकार की ओर से शासकीय सेवकों को सिर्फ 48 फीसदी ही मंहगाई भत्ता दिया जा रहा है| इस बात को लेकर चुनाव से पहले शासकीय कर्मचारियों के कुछ संगठनों ने विरोध भी दर्ज कराया था लेकिन राज्य सरकार ने उनकी नहीं सुनी| लिहाजा जब राज्य सरकार ने शासकीय सेवकों के प्रति उदासीनता दिखाई तो लोकतंत्र के सबसे बड़े महापर्व में शासकीय सेवकों ने भी चुनाव में दिलचश्पी नहीं ली है| खुद तो शासकीय सेवकों ने वोट डाल दिया है लेकिन उन्होने अपने परिवार वालों को वोट डालने से इंकार कर दिया है जिसके कारण शासकीय कर्मचारियों के परिजन पोलिंग बूथों तक नहीं पहुंच रहे हैं| गौरतलब है कि प्रदेश में करीब साढ़े सात लाख शासकीय कर्मचारियों की संख्या है और उनके परिवार वालों की संख्या को भी जोड़ लिया जाए तो यह आंकड़ा बहुत बड़ा हो जाता है| कुछ कर्मचारी नेताओं से इस मामले में बात की गई तो उन्होने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि मामला सिर्फ मंहगाई भत्ते का ही नहीं है| प्रदेश में पदोन्नति पर भी रोक लगी हुई है जिसके कारण हजारों कर्मचारी बिना पदोन्नति को रिटायर हो गए और अब भी बहुत से कर्मचारी रिटायर होने की कगार पर हैं जिनकी पदोन्नति आज तक नहीं हुई| प्रदेश की भाजपा सरकार सिर्फ मोदी की गारंटी पर ही फोकस करती रही लेकिन शासकीय सेवकों की तरफ मोहन सरकार ने ध्यान नहीं दिया| और अब उसके परिणाम सामने आ रहे हैं|

 

 

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